बात वो है जो होंटो पर हो , मन में ख्याल होता है
जीत वो है जो हाथों में हो , हार पर सवाल होता है
अपने हाथों को इस तरह फैला लो कि
सारा आकाश इनमें समा जाए
कतरा कतरा जीना भी क्या जीना है
क्यों जिंदगी में कड़वाहटों का ज़हर हो
क्या जरूरी उस ज़हर को पीना है
अपने होते है वों सपने जिनमें जीने का एहसास होता है
हकीक़त का अक्स क्या होता है
खुशियों और गम का समा होता है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें